Sayari

December 26, 2018
*झट से बदल दूं, इतनी न हैसियत न आदत है मेरी..*

*रिश्ते हों या लिबास, मैं बरसों चलाता हूँ..*


 कोई पढ़ाता नही फिर भी सबक याद रहता है…..हर एक परिंदे को अपना पेड़ याद रहता है… 🙏


तबियत जाननी है तो नब्ज़ न पकड़ो मेरी
         इक दीदार करा दो उसका हर मर्ज़ की दवा है जो.......


 बहुत जिये उनके लिये जिनको हम पसंद करते थे...!!
 अब जीना है उनके लिए जो हमें पसंद करते है....  💕💕



आ जाओ👉🚶‍♀ सीने से लिपट जाओ मेरे…*

*ये दिसम्बर की सर्द हवाएँ तुम्हे बीमार ना कर दे ।।*


हर वक्त मिलती रहती है*
*अनजानी सी सजा..*

*मैं कैसे पूछूं तक़दीर से*
*मेरा कसूर क्या है..*
"हर कोई "मुझे" जिंदगी जीने का तरीका" बताता है....*

*"उन्हें" कैसे समझाऊँ  की "कुछ ख्वाब अधुरे" हैं वर्ना जीना मुझे भी आता है*
... 🍁🍁🍁...



: *ख़तरे में तुम्हारी रोज़ की, ......इबादत पड़ जाएगी.....*

*रोज़ मेरी शायरी पढ़ोगे तो.....मेरी आदत सी पड़ जाएगी.....*💕💕



: *पांवों के लड़खड़ाने पे तो सबकी है नज़र,*

*सर पे कितना बोझ है कोई देखता नहीं।*



‬: *नाम तो कमाना पड़ता है साहब,*

*खैरात में तो सिर्फ बदनामी मिलती है !!*




‬: सभी मेरी थोड़ी थोड़ी तारीफ करो ना

मुझे शरमाये बहुत दिन हो गये है।


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🌹रिश्ते होते है      मोतियो की तरह कोई गिर भी जाये      तो झुक कर उठा लेना चाहिए 🌹 💖साथ बिताई..... तेरे संग... वो शाम ......सुहानी...